स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से विश्व पटल पर भारत एक विकासशील देश में गिना जाता रहा है | शिक्षा के क्षेत्र में भी हमारा देश विकास की नई इबारत लिखता आ रहा है | बालिका शिक्षा को बढावा देने के लिए स्वतंत्र भारत में नई- नई योजनाएं शुरू की गई | इससे बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन के साथ- साथ एक नई दिशा भी मिली, किन्तु बालकों के शिक्षा पर सरकारों ने कोई योजना नहीं बनाई या दुसरे शब्दों में ये कहे की बालको के शिक्षा को बढावा देने के लिए योजना ठंडे बस्ते में ही रह गई | इसका दूरगामी परिणाम हमें छत्तीसगढ़ राज्य में पिछले कुछ वर्षो के दौरान एक सर्वे में देखने मिला है कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने में लडको की तुलना में लड़कियों की संख्या का अनुपात 1:1.46 है | अर्थात बालको की तुलना में बालिकाएं उच्च शिक्षा प्राप्त करने में आगे रही है |
एक सर्वे के मुताबिक छत्तीसगढ़ राज्य में हर वर्ष कक्षा आठवीं के बाद पढाई छोड़ने वाले बच्चों में लड़कियों के मुकाबले लड़को की संख्या अधिक है | आंकड़ो में लडको के द्वारा पढाई छोड़ने का कारण "रोजगार की तलाश" अर्थात "काम के लिए" बताया गया है | इससे न केवल छत्तीसगढ़ में बल्कि पुरे भारत में सामाजिक असंतुलन की स्थिति निर्मित होती दिखाई दे रही है | जो न केवल भारत के विकास में बाधक तत्व साबित होगी बल्कि सामाजिक संतुलन के सिद्धांत के लिए भी खतरा होगी | यह बहुत ही गंभीर विषय है कि आखिर क्यों...? 14 वर्ष के बाद लड़को को परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लिए विवश होकर पढाई बीच में ही छोड़ना पड़ रहा है? हमारे समाज के लिए भी यह एक विचारणीय प्रश्न है कि बालको में गिरते शिक्षा का स्तर ऊपर उठाने के लिए क्या परिवर्तन किया जाना चाहिए?
केंद्र और राज्य सरकार को इन आंकड़ो को गंभीरता से लेकर बालको की शिक्षा के लिए नए सिरे से योजना बनाने की आवश्यकता है | |

सामाजिक संतुलन बनाए रखना नितांत आवश्यक है। बालक वर्ग बालिकाओं के मध्य शिक्षा का बिगड़ता अनुपात चिंताजनक है ।
ReplyDeleteबढ़िया शुरुआत भाई,
ReplyDeleteआज लिंगभेद की समाप्ति के प्रयास ने दूसरा लिंगभेद पैदा कर दिया है जिसने कन्या सत्कार और बालक तिरस्कार का रूप ले लिया है
जबकि लिंग संतुलन हमारा प्रयास होना चाहिए था ...
हर जगह हर क्षेत्र में पुरुषजाति भेदभाव का शिकार हो रहा है और आश्चर्य होता है कि यह भेदभाव कि स्थिति पुरूषजाति ही कर रहा है और इसके दुष्परिणाम से अनभिज्ञ है।
ReplyDelete