होलिका दहन के साथ ही अगले दिन होली का त्योहार मनाया जाता है | होली खुशियाँ बाटने, एक दुसरे से प्रेम जताने, प्रकृति को रंगों से सजाने, दिलों में पनप रहे नफ़रत को भुलाने, आपसी भाईचारे, परिवार और समाज में उत्पन्न हो रहे मतभेदों को भुलाने का त्यौहार है | होलिका दहन, बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है | भक्त प्रह्लाद को मारने के लिए राक्षस हिरन्य कश्यप और होलिका ने बहुत प्रयास किया | भक्त प्रह्लाद को होलिका ने अग्नि में जलाने का प्रयास किया किन्तु वह अपने प्रयास में असफल रही थी और वह स्वयं ही अग्नि में जलकर भस्म हो गई, जबकि भक्त प्रह्लाद को कुछ नहीं हुआ |
हिरन्य कश्यप जैसे राक्षस हमारे समाज में आज भी मौजूद है, जो भक्त प्रह्लाद जैसे पुरुषों को ख़त्म करने के प्रयास में लगे हुए है | हिरन्य कश्यप रूपी राक्षस एकपक्षीय महिला कानून जैसे- दहेज प्रताड़ना, घरेलु हिंसा, यौन शोषण, अनाचार, छेड़-छाड़ इत्यादि कानूनों का निर्माण कर रहे है | इन कानूनों का निर्माण केवल और केवल प्रह्लाद रूपी पुरुषों को प्रताड़ित करने के लिए किया जा रहा है | इन कानूनों की प्रताड़ना से तंग आकर हजारों की तादाद में निर्दोष पुरुष आत्महत्या तक कर ले रहे है | पुरुषों को भी अपने मान- सम्मान की रक्षा के लिए ये आत्मघाती कदम उठाना पड़ रहा है | इन झूठे आरोपों के लगने मात्र से समाज उन्हें अपराधिक नज़र से देखने लगता है |
होलिका जैसी महिलाएं आज भी हमारे समाज का हिस्सा हैं जो भक्त प्रह्लाद रूपी पुरुषों को जलाने का प्रयास कर रही है | होलिका रूपी महिलाएं एकपक्षीय महिला कानूनों का दुरूपयोग करते हुए झूठे दहेज प्रताड़ना, झूठे घरेलु हिंसा, झूठे यौन शोषण, झूठे अनाचार, झूठे छेड़- छाड़ जैसे मामले दर्ज करवाकर प्रह्लाद रूपी पुरुषों को जलाने के कार्य में लगी हुई है | इन झूठे आरोपों का शिकार निर्दोष पुरुष वर्ग हो रहा है | आखिर कब तक पुरुष इन एकपक्षीय कानूनों के शोषण का शिकार होता रहेगा ? वो वक़्त आ गया है जब इन एक एकपक्षीय कानूनों में संसोधन किया जाना चाहिए | यदि पुरुषों पर आरोप झूठा साबित होता है तो झूठा आरोप लगाने वाली महिलाओं को भी सज़ा का प्रावधान हमारे देश के संविधान में होना चाहिए | कानून के निर्माताओ को भी कानून बनाते समय यह ध्यान देना होगा कि देश के सभी नागरिको के मौलिक अधिकारों में से एक "समानता के अधिकार" का पुर्णतः पालन हो |
सत युग, त्रेता युग और द्वापर युग में भक्त की रक्षा करने स्वयं भगवान अवतरित होते रहे है, किन्तु कलयुग में भक्त प्रह्लाद रूपी पुरुषों की रक्षा कौन करेगा.? होलिका और हिरन्य कश्यप जैसे राक्षसों को सज़ा कौन देगा.?
इन विचारणीय प्रश्नों के साथ होली की हार्दिक शुभकामनाएं |

This is rightly said, male are suffering due to fake alligation and fake cases.
ReplyDelete👍👍👍👌बहुत बेहतरीन धर्मेंद्र भाई ।पुरूषों के लिए लिखने वाले बहुत कम लोग हैं।सब महिला सम्मान और महिला अधिकार के लिए ही लिखते हैं।
ReplyDeleteधन्यवाद भाई। आप सब का मार्गदर्शन ही मुझे आगे इसी तरह के लेख लिखने की प्रेरणा देगा।
Deleteधर्मेंद्र जी आपने बहुत अच्छा लेख लिखा है लेकिन भारतीय पुरुष सँगठन को भी चाहिए कि जिस प्रकार रावण का दहन किया जाता है उसी प्रकार होलिका दहन कर समाज में यह मैसेज देना चाहिए दुष्ट का कोई लिँग नहीं होता है लेकिन वही बात है करेगा कौन? लेख लिखना बहुत अच्छी बात है लेकिन प्रत्यक्ष समाज में इसका प्रदर्शन कर दिखाने से ज्यादा लोगों तक बात पहुंचती है
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